साथियों राजनीती में आने से पहेले हमे राजनीती के इन तीन बिन्दुओ को समझना होगा l
१. सर्वप्रथम राजनीती का पिछला इतिहास l
२. वर्तमान राजनीती का सच l
३. हमारे बच्चो , समाज और देश का भविष्य जिसे वर्तमान राजनीती ने पूरी तरह चौपट कर दिया है l
मेरे प्रिय साथियों और हम उम्र दोस्तों इससे पहेले मैं अपने सोच / विचार और उस पीड़ा को आप के सामने रखु l मैं विजय आप को अपने बारे में कुछ बताना चाहता हु l मैं कोई बहोत बड़ा राजनितिक अनुभवी व्यक्ति नहीं हु l और ना ही कोई लेखक वर्तमाना में जो हालत पैदा हुए है उसने पीडित हो कर ये कठिन कदम उठा रहा हु l
राजनीती का पिछला इतिहास:- सन १९५१ में हमारे देश में देश का प्रथम चुनाव हुआ था l उस चुनाव में लोग पूरी तरह अपने ईमान और बल पर खडे थे l राजनीती खुद पूरी तरह अपने आप में इमानदार थी और इमानदार लोग की अपनी एक अलग पहेचान थी l राजनीती में आने का जो कारण था वो देश प्रेम , सेवा , कुछ अलग करने की इच्छा थी l पार्टियों ने कोई पैसा नहीं खर्च किया था l ना कोई बैनर था , ना बहोत सारी चमकती हुयी गाड़िया थी और ना ही था कोई खाने पिने का कोई चक्कर l थी तो सिर्फ जनता और जनता का नेता जो जनता दोवारा चुना जाना था l उस समय मतदान का असली इस्तमाल हुआ था लोगो ने देश की जनता ने अपने मत का दान किया था , और मतदान क्या होता है उसका सही मतलब दिखाया और बताया था l
वर्तमान राजनीती का सच:- वर्तमान राजनीती के बारे में ख्याल आते ही मन में सिर्फ एक ही बात आता है l काश इन नेताओ को जूते मारने का एक कोई दिन भी होता तो अच्छा होता मैं भी अपने मन की पीड़ा और दर्द को कुछ जूते मार कर शांत कर लेता l खैर .......... छोडिये इन बातो को हम सभ्य समाज के लोग है ऐसे बाते करना या सोचना हमें शोभा नहीं देती l ये सभ्य समाज वाले लोग १०/५ वाले होते है सब कुछ टाइम पे होता है l जयादा बोलेंगे तो नौकरी चली जाएगी l ये सभ्य समाज लंच और चाये के टाइम ही अपना ढोल बजाती है l और चुनाव से दो दिन पहले अपने डार्लिंग और लविंग फॅमिली के साथ वोट देने के बजाये छुट्टी पर जाना पसंद करती है l लेखा जारी है ................................................
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